एक फरवरी से परीक्षा शुरू होगी। बोर्ड ने इसके लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। स्कूलों व कॉलेजों ने एडमिट कार्ड परीक्षार्थियों को बांटना शुरू कर दिया है। एडमिट कार्ड में निर्देश पढ़कर परीक्षार्थी यह सोचकर परेशान हो रहे हैं कि इस कड़ाके की ठंड में आखिर वह परीक्षा देने केंद्र तक कैसे जायेंगे। तीन घंटे तक परीक्षा भवन में ठंड कैसे बर्दाश्त करेंगे।
परीक्षार्थियों का कहना है कि ठंड से तबीयत खराब होगी तो परीक्षा छूटेगी और एक साल बर्बाद भी हो सकता है। जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि पहले भी इस तरह के निर्देश जारी हुए थे, लेकिन ठंड को लेकर जूता और मोजा पहनकर जाने की छूट दी गई थी। अभी परीक्षा में समय है। इसी तरह ठंड रही तो विभाग को इस संबंध में अनुरोध किया जायेगा।
मजबूरी है तो जाना होगा
रानी तालाब निवासी एक अभिभावक अमरनाथ शंकर ने कहा कि यह हमारी लाचारी होगी। इस तरह का निर्देश नहीं जारी होना चाहिए। मजबूरी में नियम का पालन करना होगा। एसआर सेकेंडरी हाईस्कूल ममलखा की इंटरमीडिएट की छात्रा आंचल आनंद ने कहा बिना जूता-मोजा के ठंड तो लगेगी ही, लेकिन मजबूरी है तो परीक्षा देने जाना ही होगा।
बहुत नहीं बदलेगा तामपान
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. बीरेंद्र कुमार ने बताया कि अगले 10-12 दिनों तक तापमान में कोई खास अंतर नहीं होगा। इसी तरह की ठंड रहेगी। हवा थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन तापमान में थोड़ा अधिक हो सकता है।
बीमार हो सकते हैं बच्चे
चिकित्सक डॉ. शांतनु घोष ने कहा कि बिना जूता-मोजा पहनकर इस सर्दी में घर से परीक्षा केंद्र तक आना काफी नुकसानदायक हो सकता है। छात्र- छात्राओं को सर्दी, खांसी, बुखार आदि हो सकता है। यदि नकल रोकने के लिए किया गया है तो केंद्र पर जूता रखने की व्यवस्था हो, ताकि घर से केंद्र तक बच्चे जूता पहनकर आ सकें और परीक्षा कक्षा में मोजा चप्पल पहनकर परीक्षा दे सकें।
बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, ‘उस समय ठंड का ध्यान रखा जाएगा। यह एहतियात के तौर पर निर्देश दिया गया होगा। इस संबंध में हम बात करते हैं। बच्चों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जायेगा।’