पटना :- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी आफ इंडिया (एफएसएसएआइ) अब गुड़ के बाद देश में पहली बार सब्जी मसालों की गुणवत्ता जांच को व्यापक सर्वे करा रहा है। गुरुवार व शुक्रवार को प्रदेश की राजधानी पटना समेत 12 जिलों से कुल 168 नमूने लिए जाएंगे। केंद्रीय टीम के साथ संबंधित जिले के खाद्य संरक्षा पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इस बाबत कार्यशाला में सभी अधिकारियों को सर्वे अभियान की जानकारी दे दी गई है।
यह जानकारी मुख्यालय सह गया के खाद्य संरक्षा पदाधिकारी मुकेश कश्यप ने दी। पटना के अलावा किशनगंज, अरवल, रोहतास, भोजपुर, नवादा, मधेपुरा, मधुबनी, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और मुंगेर जिले से 14-14 सैंपल लिए जाएंगे। एफएसएसएआइ ने सैंपल जांच की जिम्मेदारी नेशनल कमोडिटी मैनेजमेंट सर्विस लिमिटेड (एनसीएमएल) को सौंपी है। इससे पहले प्रदेश के पांच जिलों से गुड़ के नमूने लिए गए हैं। हालांकि, एनसीएमएल ने अभी तक इसकी रिपोर्ट प्रदेश के खाद्य संरक्षा विभाग को नहीं भेजी है।
कर रहे मिलावटखोर :-गरीब-अमीर सभी की जरूरत होने के कारण सब्जी मसालों की भारी खपत है। मसाले देखने में आकर्षक लगे, इसलिए बहुत सी कंपनियां व चक्की वाले घटिया श्रेणी के मसालों के साथ रंग भी पीस देते हैं। इससे व्यापारियों की तो मोटी कमाई होती है लेकिन पैसे खर्च करने के बाद भी ग्राहकों को कई प्रकार की बीमारियों से जूझना पड़ता है। प्रदेश के कुल 14 खाद्य संरक्षा पदाधिकारी होली जैसे पर्व पर मसालों की जांच करते हैं।
पहली बार इतने व्यापक स्तर पर मसालों की गुणवत्ता जांच की जाएगी। गर्म मसाला, हींग, जीरा, मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, दालचीनी, काली मिर्च व अमचूर जैसे मसालों का नमूना रैंडमली लिया जाएगा। सर्वे नमूनों की जांच में यह भ देखा जाएगा कि किस उत्पाद में किस तरह की मिलावट की जा रही है
होगी नमूनों की जांच :-विभिन्न राज्यों से लिए गए नमूनों की जांच एनसीएमएल आधुनिक प्रयोगशाला में कराएगा। प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री और लिक्विड केमेट्रोग्राफी जैसी तकनीकों से यह भी पता चल सकेगा कि मसालों में किस प्रकार के हैवी मेटल्स, पेस्टीसाइड आदि मौजूद हैं। पटना के अगमकुआं स्थित ड्रग एंड फूड लैबोरेटरी को भी जल्द ही न केवल एनएबीएल सर्टिफिकेट मिलने वाला है बल्कि एनालिस्ट और तकनीशियन पदों पर नियुक्ति भी की गई है। कैडर में प्रयोगशाला के लिए 14 पद पर नियुक्ति की जानी है। इसके बाद यहां फल, सब्जी, दूध, घी समेत सभी प्रकार के खाद्य नमूनों की जांच प्रदेश में हो सकेगी और मिलावटखोरों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। मसालों के बाद सबसे अधिक मिलावट घी और तेल में होती है।