बिहार में विश्व के सबसे बड़े मंदिर की स्थापना फरवरी 2025 तक, 20 जून से शुरू होगा निर्माण कार्य
बिहार के पूर्वी चंपारण में बन रहे विश्व के सबसे बड़े मंदिर विराट रामायण मंदिर का निर्माण 20 जून से होने वाला है। इसे साल 2025 के फरवरी तक पूरा कर लिया जाएगा। मंदिर के निर्माण के साथ ही यहां विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना होगी। महावीर मन्दिर न्यास के सचिव किशोर कुणाल ने मंगलवार को यह जानकारी पापराज़ी से बातचीत में दी। इसे देखे:-आप भी 5000 ₹ में करें आवेदन, हर महीने होगी 50 हजार की कमाई; मोदी सरकार ने दी मंजूरी
किशोर कुणाल ने कहा कि पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया-चकिया पथ पर कैथवलिया-बहुआरा में विराट रामायण मंदिर का निर्माण 20 जून से शुरू हो जाएगा। साल 2025 के सावन तक मंदिर में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना हो जाएगी। उसी वर्ष तक विराट रामायण मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। पूर्वी चंपारण के केसरिया में बने रहे विराट रामायण मंदिर को अंकोरवाट (कंबोडिया) की तर्ज पर बनाया जाएगा। यह अंकोरवाट मंदिर से भी दुगना ऊंचा बना हुआ है।
22 मन्दिर,12 शिखर और 3 ब्लॉक होंगे
आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि केसरिया में 3.76 लाख वर्गफुट में शैव और वैष्णव देवी-देवताओं के कुल 22 मन्दिर मंदिर बनाए जाएंगे। इसमें 12 शिखर और 3 ब्लॉक होंगे। मुख्य शिखर 270 फीट ऊंचा होगा। 20 जून से काम की शुरुआत हो जाएगी और 27 फरवरी 2025 तक मंदिर की स्थापना कर दी जाएगी। विराट रामायण मन्दिर तीन मंजिला होगा। मन्दिर में प्रवेश के बाद प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान गणेश के दर्शन होंगे। वहां से बढ़ते ही काले ग्रेनाइट की चट्टान से बने विशाल शिवलिंग के दर्शन होंगे। महाबलिपुरम में 250 टन वजन के ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर की चट्टान को तराशकर मुख्य शिवलिंग के साथ सहस्रलिंगम भी बनाया जा रहा है।
मंदिर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की होगी स्थापना
शिवलिंग की विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि शिवलिंग का वजन 200 टन, ऊंचाई 33 फीट और गोलाई 33 फीट होगी। आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि इतने वजन के शिवलिंग को लाने के लिए चकिया से कैथवलिया की 10 किलोमीटर की दूरी तक सड़क और पुल पुलिया के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का अनुरोध बिहार के मुख्यमंत्री और पथ निर्माण मंत्री से किया गया है।
मंदिर का स्थान जानकी नगर के रूप में होगा विकसित
आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि मन्दिर निर्माण के लिए 120 एकड़ जमीन उपलब्ध है। इसे जानकी नगर के रूप में विकसित किया जाएगा जहां कई आश्रम, गुरुकुल, धर्मशाला आदि होंगे।