पटना। अपने चाचा पशुपति कुमार पारस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर चिराग पासवान ने बुधवार को अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस अधिकार का पूरा सम्मान है। वह अपनी टीम में किसे शामिल करता है और किसे नहीं।
जहां तक लोजपा का सवाल है, पशुपति कुमार पारस हमारी पार्टी के सदस्य नहीं हैं। पार्टी तोड़ने जैसे कामों को देखते हुए अगर उन्हें उनके गुट से मंत्री बनाया जाता है तो लोजपा का इससे कोई लेना-देना नहीं है। चिराग ने एक ट्वीट के जरिए कहा कि पशुपति पारस को पार्टी विरोधी होने और शीर्ष नेतृत्व को धोखा देने के लिए लोजपा से पहले ही निष्कासित किया जा चुका है। अब पार्टी ने उनके केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
चिराग ने कहा था- मेरी इजाजत के बिना पार्टी के किसी भी सांसद को मंत्री बनाना गलत है
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चिराग ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के जरिए स्पष्ट किया था कि अगर पारस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में लोजपा सांसद के तौर पर शामिल किया गया या लोजपा कोटे से निष्कासित किया गया तो वह इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा था कि मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं, पार्टी मेरी है। मेरा भी समर्थन है। मेरी अनुमति के बिना किसी भी सांसद को पार्टी कोटे से मंत्री बनाना गलत है। एक अन्य ट्वीट में चिराग ने लोकसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की जानकारी दी है, जिसके तहत पारस को लोजपा संसदीय दल का नेता नियुक्त किया गया है।
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हालांकि फिलहाल सभी कयासों पर विराम लग गया है। लेकिन अब जब चिराग ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी है तो सबकी निगाहें उन पर होंगी। इधर, भाजपा के दिग्गज नेता रविशंकर प्रसाद के इस्तीफे को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।